गिरिडीह — सिखों के नवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के शहादत दिवस को लेकर पूरे देश में तमाम गुरुद्वारों में पिछले दो-तीन दिनों से लगातार कार्यक्रम किया जा रहे हैं। इसी कड़ी में गिरिडीह में भी पंजाबी मोहल्ला स्थित गुरुद्वारा में संध्या बेला में कीर्तन दरबार का आयोजन किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में सिख श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारा पहुंचकर माथा टेका का तथा गुरुजी की शहादत को नमन किया। इस मौके पर स्थानीय रागी जत्थे द्वारा शब्द कीर्तन किया गया तथा गुरु जी के जीवन पर उनकी शहादत पर प्रकाश डाला गया।इसके साथ ही साथ गुरु महाराज के तीन शिष्यों भाई दयाला, जी भाई सती दास जी, भाई मती दास जी की भी शहादत को याद कर उन्हें भी नमन किया गया।
वंही मौके पर कीर्तन दरबार के आयोजन के बाद अरदास के उपरांत लंगर का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर पंजाबी मुहलला गुरुद्वारा के मुख्य सेवादार भूपेंद्र सिंह दुआ ने बताया कि किस तरह विषम परिस्थिति में गुरु महाराज ने धार्मिक स्वतंत्रता और मानवता को लेकर अपनी और अपने शिष्यों के शहादत दी जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है। इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में गुरु सिंह सभा गिरिडीह के प्रधान डॉक्टर गुणवंत सिंह मोंगिया, सेक्रेटरी नरेंद्र सिंह समी, उपाध्यक्ष परमजीत सिंह दुआ, सरदार देवेंद्र सिंह, ट्विंकल सिंह, मिंकल सिंह, अमन सिंह, सरदार गुरुभेज सिंह कालरा, राजेंद्र सिंह, अजिनदर सिंह चावला, रणजीत कौर, जगजीत कौर, जसविंदर कौर, गुरमीत कौर, इस्मीत कौर, अमनप्रीत कौर, हरप्रीत कौर, रविंदर कौर, सिफत कालरा पर आदि का सराहनीय सहयोग रहा।

