गिरिडीह: स्टेशन रोड स्थित मुख्य गुरुद्वारे में सिखों के नवें गुरु, ‘हिन्द दी चादर’ श्री गुरु तेग बहादुर जी का 405वां प्रकाश पर्व मंगलवार को पूरी श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर शाम से ही गुरुद्वारे में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
मंगलवार को स्टेशन रोड गिरिडीह स्थित मुख्य गुरुद्वारे में सिखों के नवें गुरु हिंद दी चादर कहे जाने वाले गुरु तेग बहादुर जी का 405 वां प्रकाश पर्व बड़े ही श्रद्धा और भक्तिभाव से मनाया गया। संध्या काल में हुए आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में सिख समाज के श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारा पहुंचकर माथा टेका तथा शब्द वाणी का आनंद उठाया ।इस दौरान स्थानीय रागी भाई ने गुरु तेग बहादुर जी के कीर्तन, तन धाना कछू न संग चालै,तज देहु मन अभिमाना एवं धन दारा संपत्ति सकल, जिनि अपनी करि मानि। इन में कुछ संगी नहीं, नानक साची जानि कीर्तन सुन संगत निहाल हुए। गुरु तेग बहादुर जी की यह बाणी और शब्द आध्यात्मिक वैराग्य, ईश्वर भक्ति, और निर्भयता का संदेश देते हैं। उनके प्रमुख शब्द और पद आत्मा की शुद्धि और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण को उजागर करते हैं। वंही मौके पर
कीर्तन समाप्ति के बाद अरदास एवं सुखासन जी के बाद गुरु का अटूट लंगर का आयोजन किया गया। जिसमें काफी संख्या में सिख परिवार के लोगों ने गुरु का अटूट लंगर ग्रहण किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री गुरु सिंह सभा गिरिडीह के प्रधान डॉक्टर गुणवंत सिंह मोंगिया सचिव सरदार नरेंद्र सिंह शमी, डॉक्टर सरदार अमरजीत सिंह सलूजा,सरदार चरणजीत सिंह सलूजा, सरदार त्रिलोचन सिंह सलूजा, सरदार परमजीत सिंह दुआ, सरदार भूपेंद्र सिंह दुआ,सरदार अजीनद्र सिंह चावला, सरदार राजेंद्र सिंह बग्गा सहित सिख समाज के कई गणमन्यों का सहयोग रहा।
