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नक्सलवाद पर करारा प्रहार: खपिया के बीहड़ों में जांबाजों ने ढेर किए टॉप नक्सली

Hazaribagh : घना जंगल, दोपहर का सन्नाटा और उस सन्नाटे को अचानक चीरती गोलियों की तड़तड़ाहट। हजारीबाग के खपिया जंगली इलाके में शुक्रवार को कुछ ऐसा ही मंजर बना, जब सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच आमना-सामना हुआ। यह सिर्फ एक मुठभेड़ नहीं थी, बल्कि लंबे समय से सक्रिय एक बड़े नक्सली नेटवर्क पर तीखा प्रहार था।

खुफिया सूचना से शुरू हुई कहानी
CRPF के IG साकेत सिंह ने मीडिया को बताया कि पूरी कार्रवाई की शुरुआत एक पुख्ता इनपुट से हुई। खबर थी कि भाकपा माओवादी का एक मजबूत दस्ता हजारीबाग और चतरा की सीमा पर डेरा जमाए बैठा है। इस दस्ते का नेतृत्व कर रहा था शहदेव महतो। उस पर 15 लाख का इनाम था और उसके नाम से इलाके में दहशत फैली हुई थी। सूचना मिलते ही 209 कोबरा बटालियन और झारखंड पुलिस ने बिना वक्त गंवाए जंगल की ओर कूच किया। जवानों को अंदेशा था कि सामने से कड़ा मुकाबला हो सकता है।

जंगल में आमना-सामना और शुरू हुई गोलीबारी
शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे, केरेडारी थाना क्षेत्र के खपिया जंगल में सर्च के दौरान अचानक हलचल हुई। सामने माओवादी दस्ता था। कुछ सेकंड की खामोशी के बाद गोलियां चलनी शुरू हो गईं। जंगल गोलियों की आवाज से दहल उठा। जवानों ने मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई शुरू की। काफी देर तक चली इस मुठभेड़ में आखिरकार सुरक्षाबलों का पलड़ा भारी रहा।

एक-एक कर गिरे बड़े नाम
मुठभेड़ के बाद जब सर्च ऑपरेशन चला, तो चार नक्सलियों के शव बरामद हुए। इनमें सबसे बड़ा नाम शहदेव महतो का था। उसके साथ रंजीत गंझु, नताशा और बुधन करमाली भी मारे गए। ये सभी संगठन में अहम भूमिका निभा रहे थे और कई आपराधिक मामलों में शामिल थे। लंबे समय से इनकी तलाश चल रही थी।

हथियार और सुराग, जो खोलते हैं अंदर की कहानी
मौके से दो एके 47, एक कोल्ट एआर 15 और एक इंसास राइफल बरामद की गई। इसके अलावा रोजाना इस्तेमाल की चीजें भी मिलीं। इससे साफ है कि यह दस्ता लंबे समय से जंगल में सक्रिय था और किसी बड़े प्लान की तैयारी में था। सुरक्षाबलों के लिए यह बरामदगी सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि कई अहम सुराग भी है, जो आगे की कार्रवाई को दिशा देंगे।

इलाके में बदली तस्वीर
पारसनाथ से लेकर लुगूझुमरा तक का इलाका लंबे समय से नक्सली गतिविधियों के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन इस ऑपरेशन के बाद तस्वीर बदलती दिख रही है। पुलिस का दावा है कि इस कार्रवाई से इलाके में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को लगभग खत्म कर दिया गया है। हालांकि अभी भी जंगल में सर्च ऑपरेशन जारी है, ताकि कोई भी उग्रवादी बचकर न निकल सके।

आत्मसमर्पण की आखिरी चेतावनी
इस पूरी कार्रवाई के बाद झारखंड पुलिस ने साफ संदेश दिया है। जो भी उग्रवादी अब भी सक्रिय हैं, वे हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करें। सरकार की नीति के तहत उन्हें मुख्यधारा में लौटने का मौका मिलेगा।

 

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