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बालू को वैध रूप से कंपनिया खरीदे ऐसा जिला खनन पदाधिकारी ने पहल नही की:महेश महतो

बालू को वैध रूप से कंपनिया खरीदे ऐसा जिला खनन पदाधिकारी ने पहल नही की:महेश महतो

हंटरगंज का चालान और टंडवा नदियो के बालू से औधौगिक नगर में हो रहा निर्माण

टंडवा:अंचल क्षेत्र में औद्योगिक नगर का निर्माण चहु ओर हो रही है।किसी प्रकार की संरचना को निर्माण करने के लिये बालू एक आवश्यक सामग्री मानी जाती है। इसके बिना शायद कोई निर्माण कार्य संभव हो सके।लेकिन सरकार की गलत नीती के कारण नदियो से वैध बालू उठाव पर कोई ठोस निर्णय नही लिया गया।कन्ट्रक्शन कंपनियो का कहना है की सरकार जितना प्रकार की नियम शर्त बनाती हमलोग तैयार है।उस अनुसार बालू लेने के लिये।मिडिया में नाम नही आने के शर्ट पर एक टंडवा क्षेत्र में निर्माण कार्य कर रही कंपनी ने आजाद सिपाही सवांददाता को बताया की चतरा जिला में हंटरगंज के नदियो को निविदा के आधार पर चालान निर्गत किया गया है।बाकि टंडवा अंचल क्षेत्र में नदियो के नाम पर चालान निर्गत नही किया जाना।पहाड़ जैसी चुनौती खड़ी किया गया है।कन्ट्रक्शन कंपनीयो को चालान हंटर गंज के नदीयो से 16-18 रूपये प्रति सेफ्टी बालू का चलान ऑनलाइन या फिर ऑफ़लाइन से लेना पड़ता है बताया।सूत्र बताते है की सरकार ने एक प्रति सेफ्टी बालू की कीमत 1.25 पैसा है, वही 0.35 पैसा जीएसटी इत्यादि लगाकर एक सेफ्टी बालू की लागत अधिक से अधिक 1.80 पैसा हो सकता है।पर टंडवा के औधौगिक नगरी कहें जाने वाले प्रखंड जिला से लेकर राजधानी तक अधिकारियो के लिये कामधेनु इलाका है।जहा एक सेफ्टी बालू की कीमत 16 से 18 रुपया प्रति सेफ्टी बालू का कीमत वसूली किया जा रहा है।चालान हंटर गंज का लेकर टंडवा के विभिन्न घाटो के नदी से बालू टंडवा की कंट्रक्शन कंपनियो धड्ड्ले से तस्करो के माध्यम से उठाव किया जा रहा है।इसमें प्रति गाड़ी 100 रुपया मुखिया से लेकर 100प्रति गाड़ी प्रशासन तक की वसूली की चर्चाये बाजार में गर्म है।इस संबंध में आजसू के चतरा कार्यवाहक जिला अध्यक्ष महेश महतो कहते है की पूर्व की एनडीए सरकार ने बालू घाटो पर निविदा जारी किया था इससे किसानो से लेकर कंपनियो तक बालू उठाने में कोई परेशानी नही हुई।उस समय बालू सस्ती थी।आज सरकार बालू घाटो को बिना निविदा के भी बालू किसानो को 2000 रूपये प्रति गाड़ी तस्करो से खरीदना पड़ता है।अर्थात उन्होंने सरकार की नीतियो पर प्रहार करते हुये कहा की जिला प्रशासन खुले रूप से बालू के नाम पर 2 रुपया की जगह 16 से 18 रुपया प्रति सेफ्टी की वसूली कर रही है।इसकी जाँच एजेंसी से जाँच किया जाये तो कई राज खुल सकते है।बालू के नाम काले खेल के कई पर्दे उठ सकते है।श्री महतो ने राज्यो के स्वामित्व वाला झारखंड राज्य विकास निगम लिमिटेड को जिम्मेदार ठहराया।

Shamsher Editor in chief
Author: Shamsher Editor in chief

14/08/1980

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