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गढ़वा के पटाखा दुकान में कैसे लगी आग, यहां जानें पूरी डिटेल्स

Garhwa : गढ़वा के रंका के गोदरमाना ग्रामीण बैंक के सामने पटाखा व्यवसायी कुश कुमार गुप्ता को पटाखा जलाकर दिखाना भारी पड़ गया। कुश कुमार गुप्ता पड़ोस के दो बच्चे नमन कुमार केसरी और भोला केसरी को पटाखा जलाकर दिखा रहा था। इसी क्रम में पटाखे की दुकान में आग लग गई। चारों तरफ पटाखे फूटने लगे। दुकानदार अपने साथ दो बच्चे, एक कर्मी एवं एक ग्राहक अजीत कुमार केसरी को लेकर अपने पास के बगल वाले गोदाम की दुकान में चला गया और शटर बंद कर दिया, ताकि आग की लपटें दुकान के अंदर तक ना जा सके, लेकिन दुर्भाग्यवश शटर का कुछ भाग खुला रह गया। धुंआ भरने लगा। लोग जान बचाने के लिए भागने लगे। इसी बीच आसपास के कुछ दिलेर लोगों ने आग बुझाने के लिए भरपूर प्रयास किया। लोगों को यह पता नहीं था कि जिस दुकान में आग लगी है उसके अंदर कुछ लोग जान बचाने की खातिर छुपे हुए हैं। जब जानकारी हुई तो जेसीबी की मदद से दीवार तोड़कर पांचो को बाहर निकाला। चुंकि दुकान छत्तीसगढ़ के ब़ॉर्डर के पास था, इस चलते छत्तीसगढ़ के अस्पताल में सभी को भर्ती कराया, जहां पर प्राथमिक उपचार के क्रम में डॉक्टरों ने पांचो को दम घुटने से मौत हो जाने की जानकारी दी।

इधर, वारदात की फैली खबर के बाद गढ़वा पुलिस कप्तान दीपक कुमार पांडेय, रंका SDO संजय कुमार पांडेय, SDPO रोहित रंजन सिंह और इंस्पेक्टर सुभाष पासवान पूरी टीम के साथ स्पॉट पर पहुंचे। SP ने मीडिया को बताया कि पांचो की पटाखे में आग लगने के कारण दम घुटने से मौत हुई है। ग्रॉसरी की दुकान में पटाखे बेचे जा रहे थे। पटाखे खरीदने के लिए बच्चे वहां पहुंचे थे। अचानक पटाखे में आग लगने के बाद बच्चे और लोग दुकान का शटर बंद कर अंदर छुप गए थे। दुकान में वेंटिलेटर नहीं था। आग जब लगी तो धुंआ दुकान के अंदर घुसा और दम घुटने से सारे लोग बेहोश हो गए। काफी देर बाद आसपास के लोगों को दुकान के अंदर बच्चे और लोगों के रहने की जानकारी हुई तो उन्होंने दीवार काटकर सभी को बाहर निकाला। उन्हें छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। घटनास्थल पर पुलिस जवानों की तैनाती की गई है। इस घटना से बाजार क्षेत्र में दहशत का माहौल है। वहीं घटना को लेकर CM हेमंत सोरेन ने भी जिला प्रशासन को जांच का निर्देश दिया है।

Shamsher Editor in chief
Author: Shamsher Editor in chief

14/08/1980

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