साहित्य की दुनिया में हर रचनाकार का पहला कदम उसका “पदार्पण” सबसे महत्वपूर्ण होता है.इसी अर्थ को जीवंत करती है यह पुस्तक “पदार्पण”, जो बीएंडके क्षेत्रीय वित्त प्रबंधक सह कवि ज्ञानेंदु चौबे ‘फ़िक्र’ की प्रथम काव्य एवं ग़ज़ल संग्रह है. यह संग्रह एक अधिकारी से कवि बने व्यक्ति की आत्मयात्रा का सुंदर दस्तावेज़ है, जिसमें जीवन, समाज, रिश्ते, संघर्ष और संवेदनाओं के अनेक रंग झलकते हैं.लेखक ज्ञानेंदु चौबे, जिन्होंने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के बीएंडके क्षेत्र में क्षेत्रीय वित्त प्रबंधक के रूप में अपनी सेवाएँ दीं, प्रशासनिक कार्यों के बीच भी साहित्य और संगीत से गहराई से जुड़े रहे. उनका यह “पदार्पण” बताता है कि शब्दों की दुनिया में प्रवेश उम्र या पद नहीं, बल्कि संवेदना और सोच से होता है. पुस्तक की अनुक्रमणिका में पर्यावरण, समय, प्रतिबद्धता, आदमी, सच, शिवायन, आस, बेटी, राह, दर्द, हमसफ़र, सफ़र, सबेरा, हक़ीक़त जैसे शीर्षक हैं जो कवि के जीवन दृष्टिकोण और भावनात्मक गहराई का परिचायक हैं.यह संग्रह समाज, प्रेम, परिवार और आस्था सभी को अपनी कविताओं के माध्यम से जोड़ता है. लेखक ने अपने माता-पिता, पत्नी श्रीमती प्रियंका चौबे, पुत्री प्रिज्ञाशा और पुत्र प्रकल्प को इस रचना यात्रा का प्रेरणास्रोत माना है. साथ ही सीसीएल परिवार के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक माननीय नीलेंदु कुमार सिंह और निदेशक वित्त श्री पवन कुमार मिश्र नें भी श्री चौबे को अपनी शुभकामना संदेश के माध्यम से उनके प्रयास और व्यक्तित्व की सराहना की है। पुस्तक का लोकार्पण अभी हाल में संपन्न राजभाषा माह के समापन दिवस पर राँची में हुआ .
Author: Shamsher Editor in chief
14/08/1980
