Home » News Update » स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान द्वारा बोकारो के पर्यावरण-मित्र चौक पर आयोजित प्रेस-वार्ता

स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान द्वारा बोकारो के पर्यावरण-मित्र चौक पर आयोजित प्रेस-वार्ता

प्रेस-विज्ञप्ति

स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान द्वारा बोकारो के पर्यावरण-मित्र चौक पर आयोजित प्रेस-वार्ता में बोलते हुए संस्थान के महासचिव ने बताया कि बोकारो के पर्यावरण-मित्र चौक की स्थापना आज से लगभग 16 वर्षों पहले कैंप 2 मोड़ जो वर्तमान में नवनिर्मित टाउनहॉल के सामने तथा उपायुक्त आवास के बगल में है स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान के संस्थापक पर्यावरण-मित्र पं. गौरी शंकर ओझा जी के स्वर्ग गमन के पश्चात उनकी याद में बोकारो के पर्यावरण प्रेमियों, वरिष्ठ सामाजिक गणमान्य लोगों के सहयोग से संस्थान द्वारा स्थापित किया गया । चूंकि स्वर्गीय ओझा जी ने पर्यावरण के प्रति लोगों में जनजागरण हेतु इसी जगह से अधिकतर पर्यावरण संरक्षण हेतु आंदोलनों को शुरू किया था इसलिए यह स्थल संस्थान के कार्यों के संचालन हेतु ऊर्जा केंद्र एवं प्रेरणा स्थल के रूप में पूजित हो गया । इस स्थल पर संस्थान द्वारा संस्थापक प्रेरणा स्रोत पर्यावरण-मित्र पं. गौरी शंकर ओझा जी का चित्र लोहे के फ्रेम में लगाया गया । इस स्थल के बगल में स्थित हरित पट्टिका जहां लोगों द्वारा पेड़ों को काटा जा रहा था तथा शहर का कचड़ा डंप किया जा रहा था उसे संस्थान के सदस्यों ने श्रमदान द्वारा साफ सफाई कर अनेक दुर्लभ वृक्षों का रोपण किया साथ ही बहुत दूर से पानी लाकर उन्हें सिंचित किया । यहां एक वाटिका का निर्माण किया गया जिसे पर्यावरण-मित्र वाटिका का नाम दिया गया । आज इस वाटिका में दर्लभ देववृक्ष कल्पतरु, रुद्राक्ष, लाल चंदन, कपूर, सिंदूर, हींग, अंजीर, विदेशी एवं स्वदेशी कई प्रकार के आम, आंवला, स्टार फ्रूट, बादाम सहित अनेकों पौधों का रोपण कई केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों , विधायकों सहित पूर्व एवं तत्कालीन मुख्य मंत्रियों और कई प्रशासनिक पदाधिकारियों द्वारा किया गया है । इसी वाटिका के एक भाग में स्वतंत्रता सेनानी स्मृति उद्यान का शुभारंभ कुछ महीनों पहले बोकारो इस्पात संयंत्र के तत्कालीन निदेशक प्रभारी श्री बी के तिवारी जी के कर कमलों से अमर शहीद सिदो, कान्हु, चांद, भैरव, फूलों,झानो के जन्मस्थल से लाई गई पवित्र मिट्टी पर इन शहीदों के नाम पर वृक्षों को रोपित कर किया गया है । इस उद्यान में कई स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर पौधारोपण किया गया है तथा यह क्रम लगातार जारी है । धनबाद के पूर्व संसद श्री पी एन सिंह जी तथा केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री श्री संजय सेठ जी ने भी स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर इस उद्यान में वृक्षों को रोपित किया है ।

दिनांक 13 नवंबर 2025 को हमें संस्था के सदस्यों द्वारा पता चला कि कोई अनिल सिंह नाम का दबंग व्यक्ति ने पर्यावरण-मित्र चौक पर लगे पर्यावरण-मित्र पं. गौरी शंकर ओझा जी के चित्र को पूरी तरह से फाड़कर फेंक दिया है तथा चौक पर बने गोलंबर को अपने साथियों के साथ मिलकर पेंट से पोत दिया है और वहां पर कुछ दूसरा नाम लिखना चाह रहा है जिसका सदस्यों द्वारा विरोध करने पर वह अपने साथियों सहित भाग गया । मैं तुरंत और भी सदस्यों के साथ वहां पहुंचा तो घटना को सत्य पाया तथा इसे उस व्यक्ति द्वारा की गई शरारत समझ कर सिटी थाना प्रभारी को फोन से सारी बात बताया फिर नया फोटो उस स्थान पर साटा गया । फिर सदस्यों ने वाटिका में भ्रमण कर देखा तो पाया कि वहां भी लगे कई वृक्षों को नुकसान पहुंचाया गया है । हमलोग फोटो को लगाकर शाम होने पर अपने घर आ गए । 15 नवंबर 2025 को चौक पर बने गोलंबर पर पर्यावरण-मित्र चौक लिखा बैनर ठोक दिया गया । दिनांक 16 नवंबर 2025 को पूर्वाह्न में पता चला कि वही व्यक्ति कुछ लोगों के साथ आकर पुनः फोटो तथा गोलंबर पर लगे बैनर को फाड़ कर जला दिया है । मैं फिर वहां गया और पुनः थाना प्रभारी, उप पुलिस अधीक्षक सिटी को फोन द्वारा सूचना भेजा । इस कुकृत्य से सभी पर्यावरण प्रेमी अत्यंत आहत हैं तथा इसे दंडनीय अपराध माना जा रहा है । ये सब जानने के बाद ही पुलिस फिर कोई कारवाई नहीं की । दिनांक 18 नवंबर 2025 को संध्या समय पता चला कि कुछ लोग वाटिका में लगे पौधों को नोच रहे हैं तथा लोहे के घेरों को उखाड़ रहे हैं । मैं गया और इसे सत्य पाया । पर्यावरण और प्रकृति विरोधी इस कुकृत्य को लिखित रूप से मैंने सिटी थाना में दिया जिसकी प्रति उपाधीक्षक पुलिस, अधीक्षक पुलिस और उपायुक्त बोकारो को दिया । इस तरह को घटना दंडनीय अपराध है तथा शांति भाग करने वाली है । यह हम सबों की भावनाओं को आहत करने वाली है । अभी तक पुलिस द्वारा कोई भी कारवाई नहीं करना अत्यंत ही चिंतनीय तथा उस अपराधिक व्यक्ति के प्रभाव में पुलिस का होना ही दर्शाता है । अगर पुलिस द्वारा उस व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया गया तो संस्थान द्वारा आंदोलन किया जाएगा । इस चौक तथा यह लगे चित्र को हटाया या नुकसान पहुंचाया गया तो मैं आमरण अनशन या फिर आत्मदाह करने पर विवश हो जाऊंगा जिसकी सारी जवाबदेही बोकारो पुलिस तथा जिला प्रशासन की होगी ।

भवदीय

शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’

महासचिव

स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान

Shamsher Editor in chief
Author: Shamsher Editor in chief

14/08/1980

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

FOLLOW US

POll

[democracy id="1"]

TRENDING NEWS

Advertisement

GOLD & SILVER PRICE

Rashifal