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एनटीपीसी की ज़हरीली राख से हो रही तबाही का मुद्दा सिमरिया विधायक ने विधानसभा में प्रखरता से उठाया।

सरकार ने माना- ज़हरीला हो रहा है पानी तथा प्रदूषण की चपेट से क्षेत्र व छिन रही है आँखों की रोशनी

टंडवा (चतरा) सिमरिया की जनता का दर्द जब सदन में गूँजा, तो सत्ता की कुर्सियां हिल गईं। टंडवा प्रखंड में एनटीपीसी की ज़हरीली राख से हो रही तबाही का मुद्दा सिमरिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक कुमार उज्जवल ने विधानसभा में इतनी प्रखरता से उठाया कि सरकार को अपना गुनाह कबूल करना पड़ा। यह अब सिर्फ प्रदूषण का मामला नहीं, बल्कि हज़ारों जिंदगियों के वजूद की लड़ाई बन चुका है। विधायक के तीखे प्रहारों और पुख्ता सबूतों के आगे सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। सदन के पटल पर सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि नदियाँ जहर बन गई बन भी रहा है, फ्लाई ऐश के अनियंत्रित बहाव ने टंडवा की जीवनदायिनी स्कूल, सार्वजनिक स्थल एवम् नदियों को प्रदूषित कर दिया है। वही प्लाई ऐश ट्रांसपोर्टिंग कर रही कई कंपनियों की मनमानी से भी राहगीरों तथा स्थानीय लोगों व ग्रामीणों को बेहाल कर डाला है। एनटीपीसी से निकलने वाली जहरीली राख के कणों के कारण स्थानीय लोगों की सीधे आँखों में पडने से आंखों की रोशनी कम हो रही है और बीमारियों की चहलकदमी आये दिन बढ़ रही तथा फेफड़ों में कोई घातक बीमारियाँ उत्पन्न हो रही है। आगे विधायक ने सदन में गरजते हुए कहा कि कंपनियों का मुनाफा जनता की लाशों पर नहीं टिक सकता। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार और प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा है कंपनियों की लापरवाही और प्रशासन की चुप्पी ने टंडवा को नर्क बना दिया है। कागजों पर नोटिस जारी करने से फेफड़े साफ नहीं होते। हमारी नदियाँ मैली हो चुकी है प्रदूषण की कहर बरपाया जा रहा है और मासूमों की आँखों से चमक गायब हो रही है। यह पर्यावरण का मुद्दा नहीं, यह सीधे-सीधे कत्लेआम है, जिसे हम रुकवा कर रहेंगे। मुझे कागजी कार्रवाई नहीं, ज़मीनी समाधान चाहिए।

यद्यपि सरकार ने बचाव में प्रदूषण नियंत्रण परिषद द्वारा नोटिस जारी करने और पेयजल की व्यवस्था करने की बात कही है,विधायक ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर आगामी कुछ दिनों के भीतर फ्लाई ऐश के निस्तारण और स्वास्थ्य सुविधाओं पर धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ, तो यह लड़ाई केवल विधानसभा तक सीमित नहीं रहेगी। टंडवा की जनता के हक के लिए सड़क से सदन तक ऐसा आंदोलन होगा कि सिस्टम को जवाब देते नहीं बनेगा।

Shamsher Editor in chief
Author: Shamsher Editor in chief

14/08/1980

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