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झारखंड में बालिका शिक्षा को मजबूत करने पर विधायकों के साथ राउंडटेबल चर्चा

रांची: झारखंड में किशोरियों के लिए माध्यमिक शिक्षा तक पहुंच, निरंतरता और गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यूनिसेफ द्वारा झारखंड विधानसभा में एक राउंडटेबल चर्चा का आयोजन किया गया। इस बैठक में बालिकाओं की शिक्षा को सुनिश्चित करने के लिए जेंडर रिस्पॉन्सिव नीतियों और निवेश के महत्व पर जोर दिया गया।

राउंडटेबल चर्चा में झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के 35 से अधिक विधायकों ने भाग लिया। इसके अलावा यूनिसेफ झारखंड की प्रमुख डॉ. कनीनिका मित्रा, यूनिसेफ की कम्युनिकेशन, एडवोकेसी एवं पार्टनरशिप स्पेशलिस्ट आस्था अलंग तथा एजुकेशन स्पेशलिस्ट पारुल शर्मा भी मौजूद रहीं।

बैठक का उद्देश्य झारखंड में बालिकाओं की माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा जारी रखने में आने वाली बाधाओं की पहचान करना तथा उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक नीतिगत और निवेश संबंधी प्राथमिकताओं पर चर्चा करना था।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो ने कहा कि बालिकाओं की शिक्षा राज्य की प्रगति का आधार है। उन्होंने कहा कि जब लड़कियां माध्यमिक शिक्षा पूरी करती हैं तो इससे न केवल उनका जीवन बदलता है, बल्कि परिवार, समाज और पूरे राज्य के विकास को भी मजबूती मिलती है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपने-अपने क्षेत्रों में विद्यालयों को मजबूत करने, समुदाय को जागरूक करने और शिक्षा की पहुंच, सुरक्षा तथा गुणवत्ता में सुधार के लिए सहयोग करने की अपील की।

यूनिसेफ झारखंड की प्रमुख डॉ. कनीनिका मित्रा ने कहा कि बालिकाओं के लिए माध्यमिक शिक्षा में निवेश किसी भी समाज के लिए सबसे प्रभावशाली निवेशों में से एक है। उन्होंने बताया कि यूनिसेफ झारखंड सरकार और अन्य साझेदारों के साथ मिलकर समावेशी और समान शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि विशेष रूप से कमजोर समुदायों की लड़कियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर मिल सकें।

वहीं यूनिसेफ की कम्युनिकेशन, एडवोकेसी एवं पार्टनरशिप स्पेशलिस्ट आस्था अलंग ने कहा कि किशोरियों के लिए सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए नीति-निर्माताओं, शिक्षकों, समुदायों और अन्य साझेदारों के बीच समन्वित प्रयास जरूरी हैं।

इस दौरान यूनिसेफ की एजुकेशन स्पेशलिस्ट पारुल शर्मा ने अपनी तकनीकी प्रस्तुति में बताया कि नामांकन में सुधार के बावजूद लड़कियों की पढ़ाई को उच्च माध्यमिक स्तर तक जारी रखने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। उन्होंने माध्यमिक विद्यालयों की संख्या बढ़ाने, आधारभूत संरचना को मजबूत करने, पेयजल और स्वच्छता सुविधाओं में सुधार, करियर मार्गदर्शन तथा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।

राउंडटेबल चर्चा के दौरान विधायकों ने भी किशोरियों के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे विद्यालयों की दूरी, सामाजिक मान्यताएं, सुरक्षा संबंधी चिंताएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संसाधनों की कमी पर अपने सुझाव साझा किए।

चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि माध्यमिक विद्यालयों में अधिक निवेश, बेहतर आधारभूत ढांचा, शिक्षकों की नियुक्ति और समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देकर यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि झारखंड की हर लड़की अपनी शिक्षा जारी रख सके और उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सके।

Shamsher Editor in chief
Author: Shamsher Editor in chief

14/08/1980

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