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केबी कॉलेज बेरमो में 6 विषयों की पढ़ाई बंद होने के आसार, क्षेत्र में भारी आक्रोश

चांसलर पोर्टल की विसंगति और शिक्षकों की कमी से घटा नामांकन, क्लस्टर सिस्टम के विरोध में उतरे छात्र, अभिभावक और शिक्षक

बेरमो :सुदूर ग्रामीण और नक्सल प्रभावित क्षेत्र बेरमो के एकमात्र सरकारी कॉलेज, कुमार ताराचंद (केबी) कॉलेज में छह महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई बंद होने के आसार दिख रहे हैं। क्लस्टर सिस्टम के तहत मनोविज्ञान (Psychology), दर्शनशास्त्र (Philosophy), समाजशास्त्र (Sociology), उर्दू, मानवविज्ञान (Anthropology) और बंगला विषयों को बंद किए जाने की सुगबुगाहट से स्थानीय छात्र-छात्राओं, अभिभावकों, शिक्षक-शिक्षिकाओं और क्षेत्र के गणमान्य लोगों में तीव्र रोष व्याप्त है।

क्यों बंद होने के कगार पर हैं ये विषय?

कॉलेज प्रशासन और स्थानीय लोगों के अनुसार, इन विषयों में छात्र-छात्राओं की संख्या कम होने का मुख्य कारण ऑनलाइन नामांकन पोर्टल (चांसलर पोर्टल) की विसंगतियां हैं।

  1. स्कूली स्तर पर जानकारी का अभाव: क्षेत्र के सरकारी उच्च विद्यालयों में इन छह विषयों (विशेषकर मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र, समाजशास्त्र और मानवविज्ञान) की पढ़ाई नहीं होती है। इस वजह से छात्र-छात्राओं को इन विषयों की जानकारी ही नहीं मिल पाती और वे पोर्टल पर इन्हें चुन नहीं पाते।
  2. शिक्षकों की कमी: यह क्षेत्र अल्पसंख्यक बहुल भी है, जहां उर्दू पढ़ने वाले छात्रों की संख्या अच्छी-खासी रही है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से उर्दू के शिक्षक न होने के कारण इस विषय में नामांकन में भारी गिरावट आई है।
  3. अतीत का ट्रैक रिकॉर्ड: अगर विगत वर्षों के आंकड़ों को देखा जाए, तो इन सभी विषयों में छात्र-छात्राओं की संख्या पर्याप्त थी। अचानक क्लस्टर सिस्टम के नाम पर इन्हें बंद करना क्षेत्र के गरीब और पिछड़े वर्ग के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ माना जा रहा है।

गरीब और वंचित तबके के भविष्य पर संकट

बेरमो अनुमंडल का यह इलाका अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बहुलता वाला क्षेत्र है। यहां के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा का एकमात्र सहारा केबी कॉलेज ही है। यदि ये विषय बंद होते हैं, तो:

  • गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा से पूरी तरह वंचित हो जाएंगे।
  • कला (Arts) संकाय के छात्रों के पास विषयों के विकल्प बेहद सीमित रह जाएंगे।
  • शिक्षा के अधिकार और क्षेत्र के विकास को गहरा धक्का लगेगा।

प्राचार्य ने यूनिवर्सिटी को भेजा प्रतिवेदन

इस संवेदनशील मामले पर जब केबी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. लक्ष्मी नारायण से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि कॉलेज प्रशासन इस समस्या को लेकर गंभीर है।

“मैंने अपनी तरफ से एक विस्तृत और अद्यतन (Updated) प्रतिवेदन तैयार कर विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (BBMKU), धनबाद को भेज दिया है। हमारी पूरी कोशिश है और हमने यूनिवर्सिटी से पुरजोर मांग की है कि केबी कॉलेज बेरमो में इन सभी छह विषयों की पढ़ाई को हर हाल में बरकरार रखा जाए, ताकि स्थानीय छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे।”

— डॉ. लक्ष्मी नारायण, प्राचार्य (केबी कॉलेज, बेरमो)

स्थानीय जनमानस की मांग

क्षेत्र के बुद्धिजीवियों और अभिभावकों का कहना है कि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को क्लस्टर सिस्टम लागू करने से पहले जमीनी हकीकत को देखना चाहिए। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि इन विषयों की पढ़ाई बंद करने का निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। उनकी मांग है कि विषयों को बंद करने के बजाय कॉलेज में शिक्षकों की बहाली की जाए और पोर्टल की प्रक्रिया को सुगम बनाया जाए।

Shamsher Editor in chief
Author: Shamsher Editor in chief

14/08/1980

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