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श्रमिकों के मसीहा व पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह की पुण्यतिथि पर दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

कोलियांनचल से लेकर राजधानी तक याद किए गए राजेंद्र बाबू, समर्थकों ने कहा- दिलों में सदैव जीवित रहेगा उनका संघर्ष

बेरमो/रांची: झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री, कद्दावर कांग्रेस नेता और देश में श्रमिक आंदोलन के प्रखर प्रहरी स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह जी की पुण्यतिथि पर रविवार को पूरे राज्य में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कोयलांचल के बेरमो (बोकारो) से लेकर राजधानी रांची तक विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, श्रमिक संगठनों और आम जनता ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर नमन किया। इस अवसर पर उनके द्वारा किए गए ऐतिहासिक कार्यों और मजदूर वर्ग के लिए उनके संघर्षों को याद किया गया।

श्रमिकों के अधिकार के लिए समर्पित रहा जीवन श्रद्धांजलि सभाओं को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि राजेंद्र बाबू सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि शोषितों और मजदूरों की बुलंद आवाज थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और उनके कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। इंटक (INTUC) के राष्ट्रीय महामंत्री और राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ (RCMS) के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कोल इंडिया सहित देश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत मजदूर वर्ग को उनका वास्तविक हक दिलाया। वे हमेशा मजदूरों के सुख-दुख में अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे।

प्रशासनिक कुशलता की अमिट छाप वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि संयुक्त बिहार से लेकर अलग झारखंड राज्य बनने तक, राजेंद्र बाबू ने कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों (ऊर्जा, स्वास्थ्य, वित्त और संसदीय कार्य) के मंत्री के रूप में अपनी प्रशासनिक कुशलता का लोहा मनवाया। वे एक कुशल राजनीतिज्ञ और दूरदर्शी प्रशासक थे। नेता प्रतिपक्ष के रूप में भी विधानसभा के अंदर और बाहर जनहित के मुद्दों को उठाने में उनका कोई सानी नहीं था।

दिलों में अमर रहेंगी यादें पुण्यतिथि पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भावुक होकर कहा, “श्रद्धेय राजेंद्र प्रसाद सिंह जी की स्मृतियाँ और उनके द्वारा किए गए संघर्ष सदैव हम सभी के दिलों में जीवित रहेंगे। श्रमिक आंदोलन और झारखंड की राजनीति में उनके जाने से जो शून्य पैदा हुआ है, उसकी भरपाई नामुमकिन है।” इस दौरान समर्थकों ने राजेंद्र बाबू के दिखाए गए ‘सेवा, न्याय और संघर्ष’ के मार्ग पर चलने का सामूहिक संकल्प भी लिया।

Shamsher Editor in chief
Author: Shamsher Editor in chief

14/08/1980

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