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कथारा पावर अपडेट: 20 घंटे बाद बिजली बहाल, रेलवे क्रॉसिंग के पास था केबल फॉल्ट

कथारा/बेरमो: झारखंड विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) के कथारा सब-स्टेशन से जुड़े दर्जनों गांवों के उपभोक्ताओं को पिछले 20 घंटों से जारी भारी बिजली संकट से आखिरकार राहत मिल गई है। विभाग के अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई, तकनीकी टीम की कड़ी मेहनत और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से देर रात मरम्मत का काम पूरा कर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई।

भीषण गर्मी में 20 घंटे ठप रही बत्ती, इन गांवों में रहा अंधेरा

कथारा सब-स्टेशन से सप्लाई होने वाली बिजली अचानक ठप होने से कई इलाके पूरी तरह अंधेरे में डूब गए थे। भीषण गर्मी और उमस के बीच उपभोक्ताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस संकट से मुख्य रूप से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में शामिल थे:

  • बोढ़िया बस्ती और कथारा
  • खेतको और पुरनाडीह
  • खाडोतिया और सियरढाको
  • जारीडीह बाजार और चलकारी
  • (इसके अलावा आसपास के दर्जनों गांवों में भी ब्लैकआउट रहा।)

फॉल्ट खोजने में छूटे पसीने, घनी झाड़ियों के बीच फंसा था केबल

बिजली गुल होने के बाद सुबह से ही विभाग की तकनीकी टीम फॉल्ट ढूंढने में जुटी थी। काफी मशक्कत के बाद देर शाम को समस्या की पहचान हो सकी।

क्या थी मुख्य समस्या?

जांच में पता चला कि रेलवे क्रॉसिंग के पास लगा हुआ अंडरग्राउंड केबल पंचर हो गया था, जिसके कारण पूरी सप्लाई ठप पड़ी थी। चुनौती यह थी कि केबल पूरी तरह से घनी झाड़ियों के बीच दबा हुआ था, जिससे कर्मचारियों को काम करने में भारी परेशानी आ रही थी।

धनबाद GM के निर्देश पर चास से मंगाई गई मशीन

जैसे ही इस गंभीर समस्या की सूचना झारखंड विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, धनबाद के महाप्रबंधक (GM) को मिली, उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए। इसके बाद काम में तेजी लाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए:

  1. जेसीबी से साफ की गईं झाड़ियां: स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से तुरंत मौके पर जेसीबी मशीन बुलाई गई। झाड़ियों को साफ कर केबल तक पहुंचने का रास्ता बनाया गया।
  2. चास से आया केबल ज्वाइंटर: केबल को जोड़ने के लिए आनन-फानन में चास से विशेष केबल ज्वाइंटर मशीन मंगवाई गई।
युद्ध स्तर पर चला काम, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

मशीन के पहुंचते ही झारखंड विद्युत निगम के तकनीकी कर्मचारियों और लाइनमैनों ने युद्ध स्तर पर मरम्मत का कार्य शुरू किया। विभाग की तत्परता और स्थानीय लोगों के बेहतरीन आपसी तालमेल के कारण आखिरकार फॉल्ट को दुरुस्त कर लिया गया। देर शाम जैसे ही गांवों की बत्ती जली, स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और विभागीय टीम का आभार जताया।

Shamsher Editor in chief
Author: Shamsher Editor in chief

14/08/1980

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