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परिवार का इकलौता सहारा छिना: गुजरात में काम कर रहे कन्हाई ठाकुर की रहस्यमयी मौत से टूटा परिवार

औरंगाबाद से अविनाश कुमार की रिपोर्ट

औरंगाबाद जिला के नवीनगर नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड संख्या-12 भवानो खाप गांव निवासी कन्हाई ठाकुर (पिता- स्वर्गीय राजेंद्र ठाकुर) की गुजरात में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।घटना की सूचना मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मृतक का शव गांव पहुंचते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई और माहौल गमगीन हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार कन्हाई ठाकुर अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए गांव के ही साकेत साव सहित अन्य लोगों के साथ गुजरात के दहेज क्षेत्र में मजदूरी करने गए थे। वहां वे रिलायंस कंपनी में हेल्पर के रूप में कार्यरत थे। बताया जाता है कि जगेश्वर गांव के समीप रिलायंस कंपनी के गेट नंबर-3 के पास उनका शव संदिग्ध अवस्था में मिला। घटना के कारणों को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, जिससे परिजनों और ग्रामीणों के बीच कई तरह की आशंकाएं बनी हुई हैं। मृतक के साथ काम करने वाले लोगों द्वारा शव को गांव लाया गया। शव के घर पहुंचते ही परिजन दहाड़ मारकर रोने लगे। ग्रामीणों की भीड़ मृतक के घर पर जुट गई और सभी ने शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाने का प्रयास किया। ग्रामीणों ने बताया कि कन्हाई ठाकुर परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनकी मौत से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। मृतक अपने पीछे पत्नी, दो पुत्र और दो पुत्रियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। परिवार पहले से ही एक बड़े दुख का सामना कर चुका है। मृतक के बड़े पुत्र प्रिंस ठाकुर की 31 अक्टूबर 2022 को एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। वहीं पुत्री कल्पना कुमारी की शादी हो चुकी है, जबकि दूसरी पुत्री सपना कुमारी और पुत्र पंकज कुमार अभी पढ़ाई कर रहे हैं। पति की मौत की खबर के बाद पत्नी शारदा देवी बेसुध हो गईं और उनका रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा मृतक के आश्रितों को उचित मुआवजा एवं सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, ऐसे में सरकार और संबंधित कंपनी को मानवीय आधार पर सहायता प्रदान करनी चाहिए।

Shamsher Editor in chief
Author: Shamsher Editor in chief

14/08/1980

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