बेरमो/ डीवीसी बोकारो थर्मल पावर प्लांट में कार्यरत अपग्रेडेशन (साफ-सफाई) के 41 मजदूरों का गुस्सा बुधवार को फूट पड़ा. एआरसी-एएमसी मजदूरों की तरह अलाउंस नहीं मिलने से आक्रोशित सफाई कर्मियों ने काम ठप कर दिया और अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी है.
मजदूरों का आरोप है कि उन्हें प्लांट में काम करने वाले अन्य एआरसी-एएमसी मजदूरों की तर्ज पर मिलने वाले समान भत्तों से वंचित रखा जा रहा है, जिससे उनका आर्थिक शोषण हो रहा है. बुधवार को जब श्रमिक अपनी मांगों को लेकर वरीय प्रबंधक सिविल सरफराज शेख से बातचीत करने पहुंचे, तो आरोप है कि प्रबंधक ने बात करने की बजाय उन्हें काम से बैठाने की धमकी दे दी. इससे मजदूरों का आक्रोश और बढ़ गया.
आंदोलनकारी सफाई मजदूरों ने जीएम एचआर को लिखित आवेदन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया है. पत्र में कहा गया है कि हर वर्ष मौखिक एवं लिखित रूप से प्रबंधन को समस्याएं बताई जाती हैं, लेकिन हर बार सिर्फ खोखला आश्वासन मिलता है. हक मांगने पर रोजगार छीनने का भय दिखाया जाता है.
*5 जून से टूल डाउन, गेट जाम की चेतावनी:*
मजदूरों ने प्रबंधन को अल्टीमेटम दिया है कि यदि 4 जून तक मांगों पर ठोस और सकारात्मक वार्ता नहीं हुई, तो वे 5 जून से पूर्ण रूप से अनिश्चितकालीन टूल डाउन आंदोलन पर चले जाएंगे. साथ ही चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर प्लांट के मुख्य द्वार को पूरी तरह जाम कर दिया जाएगा, जिसकी जवाबदेही स्थानीय प्रशासन और प्रबंधन की होगी.
आंदोलन को धार देने के लिए सफाई कर्मियों ने प्लांट के अन्य सभी एएमसी-एआरसी मजदूरों से भी एकजुट होने की अपील की है. मजदूरों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ भत्ते की नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और श्रम के सही मूल्य की है.
आंदोलन और मांग पत्र सौंपने वालों में रंजीत कुमार, गोविंद घांसी, उमेश राम, बिनोद मुर्मू, मोती तुरी, रंजीत राम, किरण कुमारी, संजय कुमार राम, सुमित्रा देवी, मालती देवी, लक्ष्मी देवी, सुमन देवी, रजनी देवी, सारो देवी, कुलदीप राम, विन्देश कुमार, संजीत कुमार नोनिया, बिलाश राम, बिनोद कुमार तुरी, अभय कुमार, विशाल राम, नरेश मरांडी, भीम राम, संदीप मसीह, दीपक कुमार राम, रंजन राम, संजय तुरी, पिंटू कुमार तुरी सहित सभी 41 सफाई मजदूर शामिल थे.
मामले को लेकर सिविल के वरीय प्रबंधक सरफराज शेख से उनके मोबाइल 8249690273 पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है!
बेरमो संवाददाता राजेश सागर की रिपोर्ट,
