रिकॉर्ड घरेलू उत्पादन से कम हुई विदेशों पर निर्भरता, खरीफ 2026 के लिए मजबूत तैयारी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत के उर्वरक क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग द्वारा उठाए गए कदमों के कारण देश खाद उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा है। इन प्रयासों ने वैश्विक संकटों और आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के बावजूद किसानों के लिए खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की है।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक स्तर पर प्राकृतिक गैस तथा अमोनिया जैसे कच्चे माल की कमी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में भारी वृद्धि हुई। इसके बावजूद भारत सरकार ने वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों की व्यवस्था कर तथा वैश्विक उत्पादकों से समन्वय स्थापित कर देश में खाद की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखी।
घरेलू उत्पादन में ऐतिहासिक वृद्धि
साल 2014 के बाद से सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
पिछले 12 वर्षों में देश में 6 नए आधुनिक यूरिया संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिससे प्रतिवर्ष 76.2 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जुड़ी है।
इसके अलावा 25.4 लाख मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता वाले दो नए यूरिया संयंत्र जल्द ही शुरू होने वाले हैं।
वर्ष 2014-15 में देश का यूरिया उत्पादन 225 लाख मीट्रिक टन था, जो 2023-24 में बढ़कर 314.07 लाख मीट्रिक टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
वर्ष 2024-25 में भी 306.67 लाख मीट्रिक टन यूरिया उत्पादन दर्ज किया गया।
पी एंड के उर्वरकों में भी बढ़ी आत्मनिर्भरता
फॉस्फोरस एवं पोटाश (P&K) उर्वरकों का उत्पादन वर्ष 2014-15 के 159.54 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 211.22 लाख मीट्रिक टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की कंपनियां नई उत्पादन इकाइयों की स्थापना की दिशा में लगातार कार्य कर रही हैं।
खरीफ 2026 के लिए रिकॉर्ड बफर स्टॉक
सरकार ने आगामी खरीफ 2026 सीजन के लिए अग्रिम तैयारी करते हुए पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों का भंडारण किया है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने खरीफ 2026 के लिए 383.9 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की आवश्यकता का अनुमान लगाया है।
इसके मुकाबले वर्तमान में लगभग 195.79 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है।
पहले जहां कुल आवश्यकता का लगभग 33 प्रतिशत स्टॉक बफर के रूप में रखा जाता था, वहीं अब यह बढ़कर 51 प्रतिशत से अधिक हो गया है।
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश का घरेलू उत्पादन 118.15 लाख मीट्रिक टन रहा है। आयात को शामिल करने पर खाद की कुल उपलब्धता में लगभग 153.79 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि दर्ज की गई है।
किसानों को महंगाई से राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद सरकार ने किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया है। भारी सब्सिडी के माध्यम से किसानों को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध कराई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की एक बोरी की कीमत 4,100 रुपये से अधिक है, जबकि भारत में किसानों को 45 किलो की बोरी मात्र 266.50 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही है।
इसी प्रकार डीएपी (DAP) की 50 किलो की बोरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,000 रुपये से अधिक की है, जबकि किसानों को यह 1,350 रुपये में मिल रही है।
पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के प्रयास भी तेज हुए हैं।
वर्ष 2025-26 में FOM, LFOM और PROM जैसे जैविक विकल्पों की बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में सात गुना वृद्धि दर्ज की गई।
अमोनियम सल्फेट की खपत में लगभग 60 हजार टन की बढ़ोतरी हुई।
कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) की देखरेख में 1.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हरित खाद (ग्रीन मैन्योरिंग) को बढ़ावा दिया गया।
निष्कर्ष
सरकार के अनुसार, आज देश में उर्वरकों की उपलब्धता मांग से अधिक बनी हुई है। घरेलू उत्पादन में लगातार वृद्धि, पर्याप्त अग्रिम भंडारण और प्रभावी आपूर्ति प्रबंधन के कारण किसानों को समय पर खाद उपलब्ध हो रही है। इससे खेती-किसानी को मजबूती मिलने के साथ-साथ देश की खाद सुरक्षा भी पहले की तुलना में अधिक सुदृढ़ हुई
Author: Shamsher Editor in chief
14/08/1980
