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भारतीय इतिहास और सनातन ऋषि-परंपरा की उत्कृष्ट धरोहर है, योग” : सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी।

कथारा: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के पावन अवसर पर डीएवी पब्लिक स्कूल, सीसीएल कथारा के प्रांगण में एक अत्यंत भव्य, गरिमापूर्ण और ऐतिहासिक योग उत्सव का आयोजन किया गया। इस विशेष उत्सव का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और समाज को ‘स्वस्थ तन, शांत मन’ का संदेश देना था। कार्यक्रम में विद्यालय के प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक के सभी कक्षाओं के छात्र-छात्राओं ने पूरे अनुशासन और उमंग के साथ हिस्सा लिया।विद्यालयी वातावरण योगमय और सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। इस वर्ष योग दिवस ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ के संकल्प के साथ मनाया जा रहा है। विद्यालय के प्राचार्य सह -झारखंड जोन -आई के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी डॉ जी.एन. खान ने समस्त विद्यालय परिवार को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि योग हमारी प्राचीन भारतीय ऋषि-परंपरा का एक अत्यंत स्वच्छ, पवित्र और उत्कृष्ट उदाहरण है। भारत में सनातन काल से ही योग का प्रचलन रहा है, जिसे हमारे गौरवशाली इतिहास, दर्शन और संस्कृति का सबसे मजबूत हिस्सा माना जाता है। आज पूरी दुनिया भारत की इस विधा का लोहा मान रही है। आधुनिक युग की भागदौड़ भरी जिंदगी, अस्वस्थ खान-पान और मानसिक तनाव के बीच योग ही एकमात्र ऐसा अचूक व प्रामाणिक माध्यम है, जो हमें बिना किसी खर्च के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ और निरोगी रख सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि योग केवल एक दिन मनाया जाने वाला कोई त्योहार या रस्म नहीं है, बल्कि इसे अपनी जीवनशैली और दैनिक दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाना होगा। यदि छात्र जीवन से ही बच्चे योग, प्राणायाम और ध्यान को अपना लें, तो उनकी स्मरण शक्ति, एकाग्रता और सकारात्मक सोच में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। एक स्वस्थ युवा पीढ़ी ही आगे चलकर एक सशक्त, ऊर्जावान और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।

सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं और शिक्षकेतर कर्मचारियों ने भी विद्यार्थियों के साथ मिलकर योग क्रियाएं कीं। कुशल योग प्रशिक्षकों के निर्देशन में छात्र-छात्राओं ने ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, वज्रासन, उष्ट्रासन, भुजंगासन और शवासन जैसे महत्वपूर्ण आसनों का अत्यंत सटीक और सजीव प्रदर्शन किया। इसके बाद अनुलोम-विलोम, कपालभाति और भ्रामरी प्राणायाम के माध्यम से बच्चों को मानसिक शांति और सांसों के नियंत्रण का अभ्यास कराया गया। ओम (ॐ) के उच्चारण और ध्यान (Meditation) के समय पूरा परिसर एक गहरी शांति और दिव्यता में डूब गया।

इस वृहद, अनुशासित और विशाल कार्यक्रम को सफलता के शिखर पर पहुंचाने में विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षण स्टाफ, सीसीए विभाग और शारीरिक शिक्षा विभाग का अतुलनीय व सराहनीय योगदान रहा। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक पंकज कुमार, नागेंद्र प्रसाद, जितेंद्र दुबे, डॉ. आर.एस. मिश्रा, तेजो मित्रा पाठक, असित कुमार गोस्वामी,श्रीमती आराधना, राकेश रंजन, रितेश कुमार , वीणा कुमारी, बी. के. दसौंधी , रेखा कुमारी,सुजला के, जयपाल साव सहित सभी शिक्षक -शिक्षिकाओं, शिक्षणेत्तर और चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों ने अपनी सक्रिय, समर्पित और अनुकरणीय भूमिका निभाई। इन सभी वरिष्ठ सदस्यों के आपसी समन्वय और कड़ी मेहनत के कारण ही सैकड़ों बच्चों का यह सामूहिक कार्यक्रम पूरी तरह अनुशासित और ऐतिहासिक रूप से सफल रहा।

तत्पश्चात, विश्व कल्याण और सर्वे भवंतु सुखिनः की कामना के साथ सामूहिक ‘शांति पाठ’ किया गया, जिसके बाद इस अविस्मरणीय योग शिविर का भव्य समापन हुआ।

Shamsher Editor in chief
Author: Shamsher Editor in chief

14/08/1980

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