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मरांग बुरु और लुगूबुरु सम्मेलन में सीएम को न्योता देने का सेंगेल ने किया विरोध।

बोकारो: आदिवासी सेंगेल अभियान ने मरांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा और लुगूबुरु घंटाबाड़ी धोरोम गढ़ समिति द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मरांग बुरु धर्मगढ़ महासम्मेलन एवं लुगूबुरु सरना धर्म सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किए जाने का विरोध किया है। संगठन ने इसे संताल समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताते हुए दोनों आयोजनों में मुख्यमंत्री को आमंत्रित करने के फैसले पर सवाल उठाए हैं।

 

शनिवार को बोकारो के सेक्टर-12/ए स्थित केंद्रीय संयोजक के आवास पर आदिवासी सेंगेल अभियान की बैठक बोकारो जिला अध्यक्ष सह बोकारो जोनल हेड सुखदेव मुर्मू की अध्यक्षता में हुई। बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि मरांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा और माझी परगना महाल की गतिविधियां संताल समाज के हितों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मरांग बुरु को बचाने की बात करने वाले संगठनों को आदिवासियों के अन्य बुनियादी सवालों पर भी स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

 

सुखदेव मुर्मू ने कहा कि 5 जनवरी 2023 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मरांग बुरु यानी पारसनाथ शिखर सम्मेद को जैन समुदाय का पवित्र तीर्थ बताते हुए केंद्र सरकार को पत्र लिखा था। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1911 में लंदन की प्रिवी काउंसिल के रिकॉर्ड ऑफ राइट्स संबंधी फैसले और 1957 के हजारीबाग गजेटियर में मरांग बुरु के साथ संताल आदिवासियों के धार्मिक संबंधों का उल्लेख मिलता है। इसी आधार पर उन्होंने मुख्यमंत्री को दोनों आयोजनों में मुख्य अतिथि बनाने के फैसले पर आपत्ति जताई।

 

उन्होंने माझी परगना महाल और मरांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा की भूमिका पर भी सवाल उठाए। सुखदेव मुर्मू ने आरोप लगाया कि मरांग बुरु को बचाने का नारा देने वाले संगठन संताल समाज के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटका रहे हैं। आदिवासी सेंगेल अभियान ने इन गतिविधियों का विरोध करते हुए समाज के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की।

 

सेंगेल ने रखीं चार प्रमुख मांगें

 

आदिवासी सेंगेल अभियान ने आदिवासी समाज के हितों की रक्षा के लिए चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें केंद्र सरकार से सरना धर्म कोड लागू कराने, झारखंड में संथाली भाषा को प्रथम राजभाषा बनाने, सीएनटी-एसपीटी कानून को सख्ती से लागू करने तथा झारखंडी डोमिसाइल नीति बनाने की मांग शामिल है। संगठन का कहना है कि इन कदमों से आदिवासियों की सांस्कृतिक पहचान और अधिकारों की रक्षा के साथ युवाओं के पलायन को रोकने में भी मदद मिलेगी।

 

बैठक में केंद्रीय संयोजक हराधन मार्डी, झारखंड प्रदेश संयोजक सुगदा किस्कू और सेंगेल सरना धर्म मंडवा के बोकारो जिला अध्यक्ष भीम मुर्मू सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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