Home » News Update » अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकी गोमिया की बेटी रेशमा कुमारी, सुनील बहादुर के साथ मिश्रित युगल स्पर्धा में जीता कांस्य पदक

अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकी गोमिया की बेटी रेशमा कुमारी, सुनील बहादुर के साथ मिश्रित युगल स्पर्धा में जीता कांस्य पदक

गरीबी और संघर्ष को पीछे छोड़ रेशमा ने मलेशिया में लहराया भारत का परचम, ऑटो चालक की बेटी ने अपनी प्रतिभा से बढ़ाया बोकारो और झारखंड का मान

 

बोकारो/गोमिया: कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और मन में कुछ कर गुजरने का जुनून हो, तो गरीबी और अभाव भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकते। इस कहावत को सच कर दिखाया है बोकारो जिले के गोमिया की बेटी रेशमा कुमारी ने। सीमित आर्थिक संसाधनों और कठिन पारिवारिक परिस्थितियों के बीच संघर्ष करते हुए रेशमा ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन कर न केवल बोकारो जिला, बल्कि पूरे झारखंड और देश का नाम रोशन किया है।

 

मलेशिया में आयोजित प्रतिष्ठित मलेशियाई ओपन – रॉयल संरक्षक कप 2026 में भारत की जोड़ी रेशमा कुमारी और सुनील बहादुर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मिश्रित युगल स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया। दोनों खिलाड़ियों के बेहतरीन तालमेल, तकनीक, धैर्य और खेल के प्रति समर्पण ने इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत को गौरवान्वित किया।

 

मलेशिया की धरती पर रेशमा और सुनील की जोड़ी ने किया कमाल

 

यह प्रतियोगिता लॉन बॉल्स यानी घास के मैदान पर गेंद से खेला जाने वाला खेल की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता थी। इसमें कई देशों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। ऐसे कठिन अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में रेशमा कुमारी और सुनील बहादुर की जोड़ी ने अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए कांस्य पदक हासिल किया।

 

मिश्रित युगल स्पर्धा में महिला और पुरुष खिलाड़ी की जोड़ी मिलकर मुकाबला करती है। इस स्पर्धा में दोनों खिलाड़ियों के बीच तालमेल, सटीक निशाना, धैर्य और रणनीति का विशेष महत्व होता है।

 

ऑटो चालक की बेटी ने संघर्ष से लिखी सफलता की नई कहानी

 

रेशमा कुमारी की सफलता केवल एक कांस्य पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन हजारों ग्रामीण और गरीब परिवारों के बच्चों के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक परेशानियों के कारण अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते।

 

रेशमा एक साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से आती हैं। उनके पिता ऑटो चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं रही कि बेटी के खेल और भविष्य के लिए सभी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें। इसके बावजूद परिवार ने रेशमा के सपनों को टूटने नहीं दिया।

 

आर्थिक चुनौतियों, संसाधनों की कमी और अनेक कठिनाइयों के बीच रेशमा ने अपने खेल को जारी रखा। उन्होंने मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास को अपनी ताकत बनाया। आज उसी संघर्ष का परिणाम है कि गोमिया की यह बेटी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पदक जीतने में सफल हुई है।

 

एक ऑटो चालक की बेटी का अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर पहुंचना और देश के लिए पदक जीतना अपने आप में बेहद गर्व और सम्मान की बात है।

 

रेशमा की यह उपलब्धि बताती है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर, अमीर परिवार या महंगी सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। सही अवसर, मेहनत और परिवार के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियां भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।

 

भाटिया एथलेटिक्स अकादमी ट्रस्ट के मुख्य संरक्षक प्रशांत अरोड़ा ने दी बधाई

 

इस शानदार उपलब्धि पर भाटिया एथलेटिक्स अकादमी ट्रस्ट के मुख्य संरक्षक श्री प्रशांत अरोड़ा ने रेशमा कुमारी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

 

उन्होंने कहा कि गोमिया की बेटी रेशमा कुमारी ने जिस तरह कठिन परिस्थितियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है, वह अत्यंत सराहनीय है। एक साधारण परिवार से आने वाली बेटी का अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के लिए पदक जीतना पूरे झारखंड के लिए गर्व का विषय है।

 

उन्होंने कहा कि रेशमा की सफलता उन तमाम गरीब, ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जिनके पास प्रतिभा तो है, लेकिन आर्थिक संसाधनों और उचित अवसरों की कमी है।

 

प्रशांत अरोड़ा ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह बच्चों को आत्मविश्वास, अनुशासन, सम्मान और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। रेशमा ने साबित कर दिया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और लगातार मेहनत से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है।

 

उन्होंने रेशमा कुमारी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि रेशमा आने वाले समय में और भी बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी तथा देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रचेंगी।

 

झारखंड की बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

 

रेशमा कुमारी की यह उपलब्धि विशेष रूप से झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों के लिए प्रेरणादायक है। राज्य के गांवों और छोटे कस्बों में आज भी ऐसी अनेक प्रतिभाशाली बेटियां हैं, जिन्हें उचित प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर नहीं मिल पाते हैं।

 

रेशमा ने अपने संघर्ष और सफलता से यह संदेश दिया है कि बेटियों को अवसर दिया जाए तो वे किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।

 

आज गोमिया की इस बेटी की उपलब्धि से उनके परिवार, क्षेत्र और खेल जगत में खुशी का माहौल है। उनके पिता का ऑटो चलाकर परिवार चलाना और उसी परिवार की बेटी का अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के लिए पदक जीतना समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

 

रेशमा कुमारी और सुनील बहादुर की यह कांस्य पदक जीत केवल एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत, आत्मविश्वास और सपनों की जीत है।

 

भाटिया एथलेटिक्स अकादमी ट्रस्ट की ओर से दोनों खिलाड़ियों को बहुत-बहुत बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

FOLLOW US

POll

[democracy id="1"]

TRENDING NEWS

Advertisement

GOLD & SILVER PRICE

Rashifal