बोकारो: जिले के बेरमो अनुमंडल के कथारा क्षेत्र में 14 सितंबर 2026 सोमवार को सुहागिन महिलाओं ने हरतालिका तीज का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया। इस अवसर पर महिलाओं ने दिनभर निर्जला उपवास रखकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की।
जारंगडीह के शिव मंदिर, अपर बंगला मंदिर,रेलवे कॉलोनी, कथारा चार नंबर, कथारा बस्ती, बांध बस्ती, आईबीएम कॉलोनी, जारंगडीह कोलियरी सहित आसपास के इलाकों में तीज पर्व को लेकर खास रौनक देखी गई। सुहागिनों ने नए-नए वस्त्र धारण कर तथा सोलह श्रृंगार कर मंदिरों में इकट्ठा होकर विधि-विधान से पूजा की।जारंगडीह शिव मंदिर,अपर बंगला,16 नंबर, माइंस क्वार्टर में पुजारी कपिल देव पांडे,संजय पांडे, राजू पांडे, मदन पंडित, कथारा दो नंबर मंदिर के पुजारी राजेंद्र मिश्रा, गुप्तेश्वर पांडे और प्रकाश पंडित ने पूजा संपन्न कराई। जारंगडीह शिव मंदिर में सुबह राजू पंडित और संध्या के समय प्रकाश पंडित द्वारा सुहागिनों को विधिवत पूजा कराकर माता पार्वती एवं भगवान शंकर की कथा सुनाई गई।पुजारियों ने बताया कि यह पर्व संकल्प शक्ति का प्रतीक है। सुहागिन महिलाओं के लिए हरतालिका तीज का सबसे ज्यादा महत्व है। हरतालिका तीज का व्रत बेहद कठिन माना जाता है। हरितालिका व्रत कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए 12 वर्षों तक वन में कठोर तपस्या की थी। पूजा के प्रभाव से भगवान शिव प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन देते हुए पति के रूप में स्वीकार करने का वर दिया।इसी मान्यता को लेकर कुंवारी कन्याएं सुयोग्य पति पाने के लिए एवं विवाहित महिलाएं अपने पति के दीर्घायु होने की कामना के साथ तीज का व्रत करती हैं। व्रत के दौरान 24 घंटे निराहार रहकर शिव-पार्वती का पूजन किया जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए करती हैं, जबकि कुंवारी लड़कियों के लिए मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत बेहद अहम होता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएं और श्रद्धालु उपस्थित रहीं। और पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा।
मोहम्मद सेराज की रिपोर्ट,
Author: Shamsher Editor in chief
14/08/1980
